Archana Aur Shri Gopal Ki 25th Anniversary

भाग्यशाली है ये जिसे कृष्ण नाम श्री गोपाल से किया है अलंकृत
और सौम्य रूप अर्चना को राधिका गोरी की उपाधी से किया है वर्णित ,
जहाँ तिरछी मुस्कान श्री गोपाल की कृष्ण की तरह है लुभाती
उधर मृद भाषी अर्चना बाँसुरी की धुन तरह , हम सब के हृदय को है छु जाती !

मित्रों कहाँ होता है ऐसा अद्भुत संयोग ,
किस दम्पति  को मिलता है राधा कृष्ण का संपूर्ण योग,
प्रेम की साहित्यावली में , मैं अगर करूँ इस रजत दम्पति की प्रशंसा ,
तो बस इतना कहूँगा की ये है प्यारी हँसीनी और यह है उसका हँसा !

मित्रों जहाँ तक प्रेम का है चक्कर ,
इन दोनों में है बहुत लगाव
लेकिन जहाँ दिन चर्या और गुणों कि होती है टक्कर
तो बिलकुल  विपरीत है  दोनो के स्वभाव !

शादी के पहले से अर्चना करती आयी है शिव की अराधना ,
श्री गोपाल जी समझ नहीं पा रहे
अब क्यों करती है यह रोज़ सुबह दो घंटे की प्रार्थना ,
इस जन्म में तो already पीस रहाँ हूँ मेंे चक्की ,
बाक़ी छः जन्म की बात  , हे प्रभु , कहीं कर तो रहीं नही यह पक्की ?

अर्चना को सुबह सुबह सेहत के लिये सैर करना है बहुत पसंद ,
श्री गोपालजी तो सैर के नाम पर बिस्तर में ही करवट बदल लेते है चंद ,
नींद से उठते ही यह बर्दाश्त नही कर सकते है अर्चना से अपनी दूरी ,
और ना ही दो कप चाय के बिना इनकी सुबह होती है पूरी  !

साथियों पाँच मिनिट भी अगर चुप रह जाये अर्चना तो पड़ जायेगी  बीमार ,
श्री गोपालजी कहते है कि मेरे तो सारे ससुराल वाले ऐसे ही यार ,
साली भी कहने को तो है आधी घरवाली ,
लेकिन बातों कि परोसती है पूरी थाली !
साले के लिये तो नामुमकिन है कुछ भी कहना ,
यह शुरू हो जाये तो पीछे रह जाएेंगी इसकी दोनों बहना !

श्री गोपालजी और समोसा की क्या बताउँ पर बड़ी विचित्र है कहानी
टीवी पर भी अगर देख ले यह समोसा तो इनके मुँह में आ जाता है पानी ,
गारंटी है , अगर तुमसे शादी नही होती थी अर्चना रानी
तो अवश्य ही कोई हलवाई की बेटी ले डूबती थी इनकी जवानी !

ख़ैर  दोस्तों यह सब तो है मज़ाक़ की बात ,
माँ बाऊजी के लिये एक पाँव पर खड़े रहते है चाहे दिन हो या रात ,
क्या मजाल नज़र अंदाज करदे माँ का कहना या सुनना ,
सही माने में वो माँ का है लाड़ला मुन्ना,

अपने काम काज में है यह बहुत ही व्यवस्थित ,
ग़लती किसी की भी नहीं बख़्शते , चाहे फिर क्यों न हो बच्चे जैसे मन के मीत ,
अर्चना जैसी कवियत्री की शान में क्या कहुँ मै कविता आज ,
यह तो समुंदर में पानी की बूँद डालने जैसा होगा काज ,
मित्रों इन दोनों का तो है दीया बाती का साथ ,
या  यूँ कह लो साथ ऐसा जैसे एक दुसरे के बिना , अधूरी है क़लम और दवात ,
जैसे ख़ुशबू कभी अलग नहीं हो सकती है चंदन से ,
वैसे ही इन दोनों के पच्चीस वर्षें बीते है एक दुसरे के स्पंदन से
अगले पच्चीस वर्ष भी इनका जीवन ऐसे ही खिलखिलाता रहे प्रभु के वंदन से
और धूम धाम से स्वर्ण जयंती मनाये विवाह के इस मधुर बँधन से ,

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