My daughter 👨‍👩‍👧

गुडीयाँ तेरी याद मे नींद बिलकुल नहीं है आती रज़ाई तक कहती है कि तेरी गर्माहट के बिना यह सर्दी भी है प्यासी रह जाती , 

रात भर करवटे बदलने से क्या मिलेगा , 

सूरज तो रोज़ सुबह अपने वक़्त पर ही खिलेगा ! 

उसे भी पता है की चाँद के आग़ोश मे नींद होती नहीं है पूरी , 

वो तो बैचारा अपनी गर्माहट से कम करना चाहता है हक़ीक़त से मेरी दूरी , 

लेकिन उसे क्या पता की, जो गर्माहट दे सकती है मेरी नूरी , 

उसे पूरी नहीं कर सकती है कुदरत की कोई भी छप्पन छुरी !

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