हमारी यह व्यस्त जीवन!

दोस्तो , आज कल हम रहते है अपने जीवन में इतने व्यस्त ,
कि हमारी निजी जिंदगी तक हो गयी है समय के  अभाव से ग्रस्त ,
न है ख़ुद के लिये और ना ही है  परिवार के लिये समय  ,
एेसे मे सामाजिक सेवा तो है बहुत दूर का विषय ,
हमारे आव भाव में दिखता है हमारी सोच का असर
कि सामाजिक कार्यों मे भाग लेने की अभी नही है हमारी उम्र ,
सिर्फ बड़े बुज़ुर्गों का है यह हमारी काम , ऐसा हम है समझते ,
ग़लती से कोई बुज़ुर्ग अगर साथ देने कह दे तो बहानों की फ़ौज तैयार है रखते ,
जन सेवा के लिये तन मन धन , तीनों का संलंगन है बहुत ज़रूरी ,
हम में से कुछ धन देकर सोचते है की हमने जन सेवा कर ली है पूरी !
लेकिन दोस्तो जन सेवा है तब तक अधूरी,
जब तक आपकी विचार धारा कम न क़र दे तन मन की धन से दूरी !
मित्रों सामाजिक सेवा  नही है कार्य सरल ,
इसके लिये मनोबल करना पड़ता है अटल ,
ऐसे ही मानव कल्याण को समर्पित है हमारा एक साथी ,
जिसका ज़िक्र करते गर्व से फूल रही है मेरी छाती ,
बिपिन राम अग्रवाल है उनका नाम
विषेशकर अग्रसेन हाँस्पिटिल के उत्थान के लिये किये है अनगिनित काम ,
बेंगलोर की विभिन्न संस्थाओं को तन मन धन से सहयोग दिया है हरदम
ऐसे कर्मठ कार्य कर्ता की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी होगी कम ,
इतनी कम उम्र में प्राप्त किया है इन्होंने इतना बडा औदा ,
कि एक दिन बरगद का  वृक्ष बनेगा हमारा ये छोटा सा पौधा ,
अध्यक्ष बनने पर हम सब देते है इन्हें बहुत बहुत शुभकामनाएँ ,
भविष्य मे भी एेसे ही जन सेवा कर हमारे समाज को ऊँचाइयों पर ले जाए !

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